NCERT Solutions For Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7 Netaji Ka Chashma
Class 10 Hindi Chapter 7 Question Answer refers to a complete set of NCERT-aligned solutions (questions with clear, exam-ready answers) for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7 “Netaji Ka Chashma,”
Written by the celebrated author Swayam Prakash, the text "Netaji Ka Chashma" (Netaji’s Spectacles) is an enlightening text that holds patriotism, responsibility towards society, and paying homage to our great national heroes. As per the revised curriculum for class 10 in the NCERT textbook, it is imperative to demonstrate proficiency in the class 10 ch 7 hindi question answer as it is crucial not only for obtaining remarkable marks in the class 10 hindi kshitij board exam in the subject of Hindi.
Just like this story, patriotism is not something big, something in the distance, in the realm of the military alone, but something that thrums in the breasts of common citizens. In this class 6 hindi chapter 7 question answer, we break it all down for you, providing a detailed elucidation on the intricacies of the story, the characters, and the meaning behind the ‘reed glasses’. Whether you are in search of a class 10th hindi chapter 7 question answer, this piece ensures all the details are right on track for success.
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Class 10 Hindi Netaji ka Chashma Question Answer
Class 10 Hindi Netaji ka Chashma Question Answer explains Captain Haldar’s dedication and his respect for Netaji. These नेताजी का चश्मा प्रश्न help students understand the story’s humor, देशभक्ति, and the importance of protecting heritage. Perfect for quick revision and exams.
1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे ?
उत्तर:- चश्मेवाला कभी सेनानी नहीं रहा परन्तु चश्मेवाला एक देशभक्त नागरिक था। उसके हृदय में देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान था। वह अपनी ओर से एक चश्मा नेताजी की मूर्ति पर अवश्य लगाता था उसकी इसी भावना को देखकर लोग उसे कैप्टन कहते थे।
2. हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा -
हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे ?
उत्तर:- हालदार साहब इसलिए मायूस हो गए कि कैप्टन अब मर चुके हैं और उसके समान अब देश प्रेमी कोई बचा न था। नेताजी जैसे देशभक्त के लिए उसके मन में सम्मान की भावना थी। उसके मर जाने के बाद हालदार साहब को लगा कि अब समाज में किसी के भी मन में नेताजी या देशभक्तों के प्रति सम्मान की भावना नहीं है।
मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है ?
उत्तर:- मूर्ति पर लगे सरकंडे का चश्मा इस बात का प्रतीक है कि आज भी देश की आने वाली पीढ़ी के मन में देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना है। भले ही उनके पास साधन न हो परन्तु फिर भी सच्चे हृदय से बना वह सरकंडे का चश्मा भी भावनात्मक दृष्टि से मूल्यवान है। अतः उम्मीद है कि बच्चे गरीबी और साधनों के बिना भी देश के लिए कार्य करते रहेंगे।
हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
उत्तर:- उचित साधन न होते हुए भी किसी बच्चे ने अपनी क्षमता के अनुसार नेताजी को सरकंडे का चश्मा पहनाया। यह बात उनके मन में आशा जगाती है कि आज भी देश में देश-भक्ति जीवित है भले ही बड़े लोगों के मन में देशभक्ति का अभाव हो परन्तु वही देशभक्ति सरकंडे के चश्मे के माध्यम से एक बच्चे के मन में देखकर हालदार साहब भावुक हो गए।
आशय स्पष्ट कीजिए –
3. “बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिएबिकने के मौके ढूँढ़ती है।”
उत्तर:- देशभक्तों ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपना सर्वस्व देश के प्रति समर्पित कर दिया। आज जो हम स्वत्रंत देश में आज़ादी की साँस ले रहे है यह उन्हीं के कारण संभव हो पाया है, उन्हीं के कारण आज़ाद हुआ है। परन्तु यदि किसी के मन में ऐसे देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना नहीं है, वे उनकी देशभक्ति पर हँसते हैं तो यह बड़े ही दु:ख की बात है। ऐसे लोग सिर्फ़ अपने बारे में सोचते हैं, वे केवल स्वार्थी होते हैं। लेखक ऐसे लोगों पर अपना गुस्सा व्यक्त किया है।
4. पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:- पानवाला पूरी की पूरी पान की दुकान है, सड़क के चौराहे के किनारे उसकी पान की दुकान है। वह काला तथा मोटा है, उसकी तोंद भी निकली हुई है, उसके सिर पर गिने-चुने बाल ही बचे हैं। वह एक तरफ़ ग्राहक के लिए पान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर उसका मुँह पान से भरा है। पान खाने के कारण उसके होंठ लाल तथा कहीं-कहीं काले पड़ गए हैं। स्वभाव से वह मजाकिया है। वह बातें बनाने में माहिर है।
5. “वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!”
कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
उत्तर:- पानवाले ने कैप्टन को लँगड़ा तथा पागल कहा है। जो कि अति गैर जिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य है। कैप्टन में एक सच्चे देशभक्त के वे सभी गुण मौजूद हैं जो कि पानवाले में या समाज के अन्य किसी वर्ग में नहीं है। वह भले ही लँगड़ा है पर उसमें इतनी शक्ति है कि वह कभी भी नेताजी को बग़ैर चश्मे के नहीं रहने देता है। अत: कैप्टन पानवाले से अधिक सक्रिय, विवेकशील तथा देशभक्त है।
• रचना और अभिव्यक्ति
6.1 निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं –
हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।
उत्तर:- यहाँ पर हमें हालदार साहब की निम्न विशेषताओं के बारे में पता चलता है –
नेताजी के रोज़ बदलते चश्मे को देखने के लिए वे उत्सुक रहते थे।
नेताजी को पहनाए गए चश्मे के माध्यम से वे कैप्टन की देशभक्ति देखकर खुश होते थे क्योंकि वे स्वयं देशभक्त थे।
कैप्टन के प्रति उनके मन में श्रद्धा थी।
पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखेंपोंछता हुआ बोला – साहब ! कैप्टनमर गया।
उत्तर:- यहाँ पर हमें पानवाले की निम्न विशेषताओं के बारे में पता चलता है –
पानवाला भावुक तथा संवेदनशील था। कैप्टन के मर जाने से वह दु:खी था।
कैप्टन के लिए उसके मन में स्नेह था। भले ही कैप्टन के जीते-जी उसने उसका मजाक उड़ाया था।
कहीं न कहीं वह भी कैप्टन की देशभक्ति पर मुग्ध था। कैप्टन याद आने पर उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
उत्तर:- यहाँ पर हमें कैप्टन की निम्न विशेषताओं के बारे में पता चलता है –
वह देशभक्त था। नेताजी के लिए उसके मन में सम्मान की भावना थी। इसलिए नेताजी को बग़ैर चश्मे के देखना उसे अच्छा नहीं लगता था।
आर्थिक विपन्नता के कारण वह नेताजी को स्थाई रुप से चश्मा नहीं पहना पाता था। इसलिए वह अपनी ओर से कोई न कोई चश्मा उनकी आँखों पर लगा ही देता था।
7. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर:- जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को नहीं देखा था तब तक वो उसे एक फौज़ी की तरह मजबूत और बलशाली समझते थे। उन्होंने सोचा होगा कि वह एक फौजी की तरह अपने जीवन को अनुशासित ढ़ंग से जीता होगा। उन्हें लगता था फौज़ में होने के कारण लोग उन्हें कैप्टन कहते हैं।
8. कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है -
इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं ?
उत्तर:- हम अपने आस-पास के चौराहों पर महान व्यक्तियों की मूर्ति देखते हैं। इस प्रकार की मूर्ति लगाने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे- लोगों को प्रेरणा देने के लिए, उन्हें तथा उनके कार्यों को याद करने के लिए, उन महान व्यक्तियों के त्याग तथा बलिदान को अमर रखने के उद्देश्य से, उनके गुणों को याद करके समाज के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से तथा ऐसे लोगों का सम्मान करने के उद्देश्य से।
आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर:- हम अपने इलाके के चौराहे पर महात्मा गाँधी तथा वैज्ञानिकों की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे। क्योंकि एक ओर जहाँ महात्माजी ने हमारे देश को आज़ाद करवाने में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने हिंसा को त्याग कर अहिंसा के पथ को प्रधानता दी।तो दूसरी ओर देश के वैज्ञानिकों ने देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए नए-नए आविष्कारों के द्वारा देश को नई दिशा प्रदान की है।
उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
उत्तर:- मूर्ति के प्रति हमारे तथा समाज के कुछ उत्तरदायित्व हैं जिन्हें हमें हर संभव प्रयास द्वारा पूरे करने चाहिए। हमें मूर्ति का सम्मान करना चाहिए क्योंकि ये मूर्ति साधारण नहीं बल्कि किसी सम्माननीय व्यक्ति का प्रतीक है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी प्रकार से मूर्ति का अपमान न हो, हमारा यह उत्तरदायित्व होना चाहिए कि हम मूर्ति की गरिमा का ध्यान रखें।
9. सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यो में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे -सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमलभी कीजिए।
उत्तर:- हम भी देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को पूरा कर के अपनी देशभक्ति का परिचय दे सकते हैं; जैसे – प्राकृतिक संसधानों का उचित उपयोग करना, समाज के कमजोर तथा ज़रुरतमंद लोगों की मदद करना, सरकार की जनकल्याण योजनोओं को सहयोग करना, समाज में हो रहे अन्याय का विरोध करना तथा देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए तन-मन-धन से सहयोग करना।
10. निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए –
कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा ? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।
उत्तर:- मानक हिंदी में रुपांतरित –
अगर कोई ग्राहक आ गया और उसे चौड़े चौखट चाहिए, तो कैप्टन कहाँ से लाएगा ? तो उसे मूर्तिवाला चौखट दे देता है और उसकी जगह दूसरा लगा देता है।
11. ‘भई खूब! क्या आइडिया है।’ इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर:- साधारण बोलचाल की भाषा पर कई भाषाओं का प्रभाव रहता है। इस प्रकार के शब्दों का उच्चारण इसलिए किया जाता है कि बहुत प्रचलित शब्द अक्सर लोगों को जल्दी समझ में आ जाते हैं। एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से उस भाषा की भावाभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि होती है इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से वाक्य अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं, दूसरी भाषा के कुछ शब्दों की जानकारी भी मिलती है। भाषा का भण्डार बढ़ता है। भाषा का स्वरुप अधिक आकर्षक हो जाता है साथ ही भाषा में प्रवाहमयता आ जाती है।
• भाषा-अध्ययन
12.1 निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए –
नगरपालिका थी तो कुछ न कुछ करती भी रहती थी।
उत्तर:- तो – माँ ने तुम्हें जो काम करने को दिया था, वह कर तो दिया।
भी – आपके साथ यह भी चलेगा।
किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा।
उत्तर:- ही – उन्हें भी आज ही आना है।
यानी चश्मा तो था लेकिन संगमरमर का नहीं था।
उत्तर:- तो – मेरे पास गहने थे तो सही लेकिन मैंने पहने नहीं ।
हालदार साहब अब भी नहीं समझ पाए।
उत्तर:- भी – तुम अभी भी नहीं समझ रहे हो।
दो साल तक हालदार साहब अपने काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरते रहे।
उत्तर:- तक – उसने मेरे कमरे की ओर झाँका तक नहीं।
13.1 निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए –
वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है।
उत्तर:- उसके द्वारा अपनी छोटी-सी दूकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से एक नेताजी की मूर्ति पर फिट कर दिया जाता है।
पानवाला नया पान खा रहा था।
उत्तर:- पानवाले द्वारा नया पान खाया जा रहा था
पानवाले ने साफ बता दिया था।
उत्तर:- पानवाले द्वारा साफ़ बता दिया गया था।
ड्राइवर ने जोर से ब्रेक मारे।
उत्तर:- ड्राईवर द्वारा जोर से ब्रेक मारे गए।
नेताजी ने देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।
उत्तर:- नेताजी द्वारा देश के लिए सब कुछ त्याग दिया गया।
हालदार साहब ने चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया।
उत्तर:- हालदार साहब द्वारा चश्मे वाले की देशभक्ति का सम्मान किया गया।
14. जैसै-अब चलते है। अब चला जाए।
माँ बैठ नही सकती।
उत्तर:- माँ से बैठा नहीं जाता।
मैं देख नहीं सकती।
उत्तर:- मुझसे देखा नहीं जाता।
चलो, अब सोते हैं ।
उत्तर:- चलो, अब सोया जाए।
माँ रो भी नही सकती।
उत्तर:- माँ से रोया नहीं जाता।
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Class 10 Hindi Chapter 7 Text Summary
To solve the hindi class 10 chapter 7 question answer, one must first understand the core narrative of the chapter. Below is a summary of the key Hindi text segments that define the story:
मुख्य अंश: "हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था। कस्बे के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगी थी। मूर्ति को देखकर लगता था कि वह किसी स्थानीय कलाकार द्वारा जल्दी में बनाई गई है। मूर्ति में सब कुछ ठीक था, बस एक चीज़ की कसर थी—नेताजी की आँखों पर चश्मा नहीं था। लेकिन चौराहे पर रुकने वाले हालदार साहब ने देखा कि मूर्ति पर एक असली काला फ्रेम वाला चश्मा लगा है।"
The Town Square and the Flawed Statue
The narrative is viewed through the eyes of Haldar Saheb, an official who passes through a small, nondescript town every fortnight. The town is a typical representation of rural India, featuring a central crossroads (Chauraha). At this crossroads stands a life-sized marble statue of Netaji Subhash Chandra Bose.
A central point in hindi chapter 7 class 10 question answer discussions is the physical state of this statue. Netaji’s identity is inextricably linked to his glasses, and their absence gave a sense of incompleteness to the statue. But, quite unexpectedly to Haldar Saheb, a real pair of broad black-framed glasses had actually been placed on the stone face by some person. Thus, in a sense, the ‘real’ and the ‘artificial’ seamlessly integrate Haldar Saheb’s curiosity in the first paragraph itself.
Captain is The Soul of the Story
As Haldar Saheb continues his visits, he notices that the spectacles on the statue change frequently. He eventually asks the local Panwala about this mystery. He learns that a man known as 'Captain' changes the glasses. Captain is a frail, elderly, and physically challenged man who sells spectacles for a living.
हिंदी प्रसंग: "हालदार साहब ने पानवाले से पूछा—'क्यों भाई, क्या बात है? यह तुम्हारे नेताजी का चश्मा हर बार बदल कैसे जाता है?' पानवाले ने बताया कि यह काम 'कैप्टन' चश्मेवाला करता है। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती है, इसलिए वह अपनी दुकान से एक फ्रेम मूर्ति पर लगा देता है।"
|
Character |
Role in the Narrative |
Primary Motivation |
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Haldar Saheb |
The Observer |
Driven by respect for others' patriotism. |
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Captain |
The Caretaker |
Driven by deep empathy and national pride. |
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Panwala |
The Informant |
Initially mocks Captain but eventually feels remorse. |
When the customer asks for a particular piece that is present on the statue, Captain takes it away, apologizes to Netaji, and brings another one in its place. The significance of the whole process represents his selfless devotion, which is an important part of the class 10 hindi ch 7 question answer analysis.
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The Transition From Mockery to Remorse
One of the most poignant subplots in ch 7 hindi class 10 is the Panwala’s attitude toward Captain. Initially, the Panwala mocks Captain, calling him "mad" and laughing at the idea of a "lame man" being a patriot. This represents a segment of society that views sincerity and devotion as a weakness.
However, the tone changes when Captain passes away.
भावुक क्षण: "अगली बार जब हालदार साहब आए तो पानवाला बहुत उदास था। उसने अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछते हुए कहा—'साहब! कैप्टन मर गया।' हालदार साहब अवाक रह गए। उन्हें लगा कि अब उस कस्बे में देशभक्ति का कोई कदरदान नहीं बचा है।"
The Reed Glasses: A Symbol of Hope
After Captain's death, Haldar Saheb is filled with despair. However, as they pass by the statue on a subsequent trip, he is shocked into silence. On the statue’s eyes sits a tiny pair of spectacles made of 'Sarkanda' (reeds or straw), the kind of makeshift toy children make.
निष्कर्ष: "हालदार साहब की आँखें भर आईं। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा सा चश्मा रखा था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हो गए और उन्होंने सोचा कि देश का भविष्य सुरक्षित है क्योंकि बच्चों में भी अपने नायकों के प्रति सम्मान की भावना जीवित है।"
The "Vision of Respect" Perspective
A unique way to interpret Chapter 7 is through the lens of The Vision of Respect. Usually, we think of a statue as a static piece of art. However, Swayam Prakash suggests that a statue is a "living" entity that requires the community's active participation to remain meaningful. By placing the glasses, Captain was not just fixing a statue; he was providing the town with a "vision" of how to treat their history. The "reed glasses" at the end act as a new set of eyes for the nation—one that is humble and resource-poor, but rich in intention.
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Benefits of PW Class 7 Study Material
Clear Concept Explanation
PW Class 7 study material explains all topics in simple language, making it easy for students to understand basic concepts clearly.
Complete Syllabus Coverage
The material is designed as per the latest CBSE syllabus and covers all subjects with chapter-wise notes.
Practice and Revision Support
It includes solved examples, practice questions, and revision exercises to strengthen learning and improve exam readiness.
Student-Friendly Learning
With structured content and expert guidance, PW study material builds confidence and helps students perform better in exams.
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NCERT Solutions For Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7 FAQs
1. Why did the sculptor leave the glasses off the statue?
The sculptor was a local teacher who had to finish the statue in a month. He likely didn't have the time to carve transparent-looking glasses out of marble or lacked the specific skills.
2. What was Haldar Saheb’s initial reaction to seeing the glasses?
He was pleasantly surprised. He appreciated the "idea" that even if the statue was made of stone, the people of the town ensured it had real glasses, showing their living connection to Netaji.
3. How did the Panwala react to Captain's death?
The Panwala was deeply moved. He had tears in his eyes and felt a sense of loss, realizing that Captain’s "madness" was actually a rare form of true devotion.
4. Why did Haldar Saheb become emotional at the sight of the reed glasses?
He was relieved to see that patriotism had not died with Captain. The reed glasses, made by children, proved that the next generation still respected their national heroes.
5. What is the central message of 'Netaji Ka Chashma'?
The story teaches that everyone can contribute to the nation. Patriotism is not just about big sacrifices; it is about the small acts of respect we show toward our country and its symbols.





